Sunday, 6 December 2015

ट्रांसफॉर्मेशन ऑफ़ गुड्डू !!!!

मैंने आज उसको फिर देखा, कुछ बदल सा गया हैं वो, दूर से मुझे लगा की भ्रम हैं। मैं सोचने भी लगा था वो हैं की नहीं। बालो में सफेदी की बूंदा - बांदी  हो गयी हैं, थोड़ा ज्यादा उम्र दराज लग रहा था। मैं उसके उम्र का हिसाब लगाने लग गया फिर मुझे याद आया अभी हाल तो उसकी शादी थी  यही कोई ३ - ४ साल पहले, मैं पुरानी यादो में खो सा गया। मैं शायद उसका सबसे अजीज था, वो हर चीज बताने मेरे पास ही तो आता था। आज वो इतना बदला - बदला सा क्यों दिख रहा हैं।  एक बार तो मैंने सोचा भी चलो अनदेखा कर देते हैं।
शायद बहुत अमीर हो गया हैं।  एक दोस्त बता रहा था उसके बारे में पैसे वाला हो गया हैं।  मेरे  अंदर उससे जलन भी हुई थी। उसके घर वाले तो उसकी तारीफ़ करते नहीं थकते थे। लेकिन वो इतना खुश  क्यू  नहीं दिख रहा। मुझे समझ नहीं आ रहा था एक अजीब सी कसमकस थी आँखों में, शायद कुछ ढूंढ रही थी उसकी आँखे, क्या ढूंढ रहा था वो ! शायद कोई अपना ढूंढ रहा था।  बहुत सारी कश्मकश !!! मैंने अपने दिमाग को झिरका, मैं अपने आप से चिढ सा गया मैं इतना सोचता क्यों हूँ।

तभी मैं देखा वो मेरी तरफ बढ़ा चला आ रहा हैं।  मैं ठिठक गया, वो नजदीक आ रहा था।  चेहरे से एक अजीब सा सूनापन नजर आ रहा था, थोड़ा उसका शरीर भी  बेडौल नजर आ रहा था। आ ते ही मैंने उसके अमीरी की दुहाई देते हुए उसे छेड़ा। वो शांत भाव से मेरी आँखों में देखने लगा। मैं सहम गया।
उसकी चिरपरिचत आँखे मुझे घूर रही थी। मानो मुझमे कुछ ढूंढ रहा हो, शायद वो अपना  दोस्त ढूंढ रहा था, मैं अंदर से डर सा गया।
मैंने सोच लिया था की मुझे उसके ड्रामे का हिस्सा नहीं बनना, साले ने शादी में पूछा तक नहीं था, बीवी मिली तो भूल ही गया था।
वो शांत भाव से  मुझे पढ़ रहा था। मैंने रोका उसे उसकी ये बड़ी बुरी आदत थी अंदर झाकने की, पूछा की क्या हैं तुम अभी भी  
    नहीं बदले। आखिर तुम को क्या चाहिए अपनेआप  से सब कुछ तो हैं तो ऐसा अनमनापन क्यू।  बड़ा ही अजीब सा जबाब दिया उसने बोला की ये सब जो देख रहे हो ये दूसरे के लिए हैं।
मुझे तो बस..........कह कर चुप हो गया। श्याद शब्द ढूंढ रहा था, थोड़ी देर शांत रहने के बाद बोला की मैं ढूंढ रहा हूँ की मुझे क्या चाहिए।
मैंने प्रतिबाद किया, ये कुछ समझ नहीं आ रहा आखिर सब कुछ तो हैं तुम्हारे पास, और क्या चाहिए।
वो मानो मुस्कुराते हुए बोला की उसे maximum possibility    चाहिए। वो अपने को cause एंड effect से अलग करना चाहता था। मैंने उसका मतलब पूछा, तुम खुश या दुखी किसी कारण से होते हो। ये कारण  को ही हटाना हैं।  यही कारण हमे  Maximum possibility से रोकती हैं।
मैंने अपना सर पीट लिया मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था फिर भी मैंने पूछा  और ये कारण को कैसे हटा सकते हैं। वो बोला की तुम किसी से अपने को मत जोरो यू शुड नोट identify विथ एनी थिंग।  पैसा, घर,परिवार, समाज, देश, धरम, जाति। सब में involve रहो लेकिन ये तुम्हे छू न पाये, तब जाकर तुम maximum possibility पा सकते हो।
मैंने झुंझलाते हुए पूछा आखिर     maximum possibility क्यू  चाहिए !!!! उसने उत्तर नहीं दिया.......... कुछ बताते बताते रह गया.........  श्याद वो एपीजे कलाम  जैसा कुछ बनना चाहता था...... मैं मन ही मन उसकी मूर्खता हस रहा था।
मैंने बात बदला और सिगरेट जलायी..........    और जलते सिगरेट को देख कर सोचने लगा.........जिंदगी में भी जलती सिगरेट की तरह तीन  चीज तो हैं....... नसा (यानी ताकत), identify ( तम्बाकू का नेचर),टाइम ( उसका बुझ जाना)।
कोई maximum possibility कैसे ला सकता हैं ।
मैंने उससे हाथ मिलाया और चलने लगा।  मैं सोच रहा था इस बेबकूफ को कोन समझाए जो हैं उससे भी हाथ धो बैठेगा, इसकी बीबी को इसको समझ पाना बहुत मुस्किल होने वाला हैं ।